
अजमेर में रामलीला के दौरान रावण का किरदार निभा रहा कलाकार शराब के नशे में इतना टल्ली था कि राम के तीरों का जवाब जेने से पहले ही वो गिर पड़ा और रामायण का एक दबंग पात्र हंसी का पात्र बनकर रह गया... इतना ही नहीं उस किरदार ने खुद को बेकसूर बताया और कहा कि उसके चेहरे से क्या लगता है कि उसने पी रखी है... लेकिन शायद उसे याद नहीं रहा कि गिरने के बाद वो खुद के पैरों पर नहीं जा सका था बल्कि उसे कई सहारों की ज़रूरत पड़ी थी... उसने धार्मिकता के परिपूर्ण रामलीला का महज हंसी की लीला बनाकर अपना पल्ला झाड़ लिया... दूसरा एक ऐसा ही मामला सामने आया यूपी के आगरा का जहां के रावण ने तो एक कदम आगे निकलकर मरने से ही इंकार कर दिया... उनका कहना था कि उनके हिस्से में संवाद कम आये और डांट ज्यादा थी इसलिए उन्होने ऐसा किया... उन्हे आयोजकों ने लाख समझाया लेकिन वो जनाब कहां मानने वाले थे उन्होने तो जैसे ठान रखा था कि बस रामलीला की लीलाओं को उल्टा कर उसे किसी और की लीला में पिरो देंगे और दुनिया को बता देंगे कि रामलीला करवाना कोई खेल नहीं... इधर कुछ ऐसी ही रीत है कौशांबी की जहां कुप्पीयों से राम और राम की सेना युद्ध लड़ती है... इसमें में खून-खराबा तक हो जाता है... खैर ये तो बात हुई देश के कुछ हिस्सों में हुई रामलीलाओं की जहां पर रावण का किरदार राम के किरदार पर भारी पड़ा और हनुमान जी तो मानो कहीं दिखाई ही नहीं पड़ी... लेकिन रामलीला का आयोजकों को समझना चाहिए की रामलीला महज् कोई खेल नहीं है बल्कि पूरी दुनिया को इनके ज़रिए ये बताने की कोशिश की जाती है कि आखिर इस धार्मिक युद्ध में किस तरह से धर्म अधर्म पर भारी पड़ा था और पाप को पुण्य ने हराया था... इन लीलाओं में महज् राम के चमत्कारों को ही नहीं दिखाया जाता है बल्कि ये दिखाया है कि विनाशकाले विपरीत बुद्दि... अच्छे से अच्छे जानकार की अगर मति मारी जाए और वो दिग्भ्रमित हो जाए तो उसका विनाश होने से कोई नहीं रोक सकता... खासतौर से बच्चों को यही शिक्षा दी जाती है कि सफलता की राह भले ही अच्छाई के लिए थोड़ी कठिन हो लेकिन अंत में जीत उसी की होती है जो सच्चा हो... तो भईये अगले रामलीला में कम से कम ऐसा ना करें कि रामलीला में इस तरह की कोई घटना घटे जो हमें शर्मिंदा करे...
