
अन्ना सिर्फ नाम नहीं बल्कि एक अभियान
अन्ना की भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही ये लड़ाई क्या उनके लिए है... शायद नहीं... ये मुहिम कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा उनको मिल रहे देशव्यापी समर्थन से ही पता चल जाता है... ये लड़ाई सिर्फ अन्ना हज़ारे की नहीं है बल्कि उन देशवासियों की है जो कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरह से भ्रष्टाचार का शिकार हुए हैं... हालांकि हमारा देश भ्रष्टाचारियों की लिस्ट में बड़ी तेज़ी से तरक्की कर रहा है... अगर इतनी तेज़ी से हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ती तो शायद देश कहां से कहां पहुंच जाता... अन्ना हज़ारे से पहले सैकड़ों जुड़े तो बाद में उनको समर्थन देने वालों की संख्या हज़ारों में पहुंच गई... मेरा लेख छपते-छपते शायद ये संख्या लाखों में पहुंच जाए... दरअसल पूरे देश में बढ़ना शब्द जुड़ा कुछ ऐसे चीजों से जुड़ा है जिनसे शायद कोई ना जुड़ना चाहे... जैसे देश में महंगाई बढ़ रही है... भूखमरी बढ़ रही है...तरह-तरह की बीमारियां बढ़ रहीं हैं तो लगातार घोटाले बढ़ रहे हैं... और घटना शब्द कुछ ऐसे पहलुयों से जुड़ता जा रहा है जिसे सुनकर शायद आपको भी निराशा हो... समाज में बेटियां घट रही हैं... प्रति व्यक्ति आय घट रही है... और तो और घोटालेखोरों को देखकर तो उत्साह भी घट रहा है... सरकारी महकमे से लेकर नेता नगरी तक हर जगह बोलबाला है भ्रष्टाचार का... ऐसे में अन्ना की ये कोशिश है कि अगर घटे तो सिर्फ भ्रष्टाचार... और बढ़े तो लोगों का भरोसा देश की सरकार में, देश के कानून में और देश की तरक्की में... आज युवाओं को जागने की ज़रूरत है क्योंकि अन्ना हज़ारे महज् एक बुजुर्ग नहीं है जो देश की सरकार के सामने हर मान ले बल्कि ये नाम एक अभियान बन चुका है... उनकी कोशिश में मेरी एक छोटी सी भेंट...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें