संभलना
इसलिए ज़रूरी है क्योंकि सोशल मीडिया से होने वाली दोस्ती और दोस्तों की फेहरिस्त तो
काफी लंबी होती है लेकिन जब आप वक्त बेवक्त ढूंढने निकलेंगे दोस्तों को अधिकतर नदारद
मिलेंगे... ये महज् कोरी अफवाह नहीं है बल्कि हकीकत है सोशल वेबसाइट्स की... फेसबुक
का दावा है कि ये दूसरों के चेहरे पढ़ लेता है... लेकिन उनका क्या जिनके असली चेहरे
ही नहीं होते इन वेबसाइट्स पर... तो ज़ाहिर सी बात है कि जिन चेहरों पर आप भरोसा कर
रहे हैं वो कितने भरोसेमंद हैं इसका आपको सहज् ही अंदाज़ा हो जाना चाहिए... अभी हाल
ही में एक ख़बर आई कि एक लड़की ने किसी लड़के के प्रपोज़ल को नहीं माना तो उस लड़के
ने लड़की का फेक प्रोफाइल बनाकर उसका फोन नंबर तक उस पर डाल दिया... ये घटना दिल्ली की है
लकिन भैय्या जहां-जहां इंटरनेट है वहां-वहां फेसबुक है... छोटे शहरों में तो इस वेबसाइट पर आना मतलब ज्यादा
आधुनिक होने की पहचान बन गया है... तो फिर कुछ भी हो जाए लोग बा अपनी तस्वीरों को बड़े
ही आकर्षक अंदाज़ में इस वेबसाइट पर लगाते हैं और दोस्तों की दोस्ती का अंदाजा़ लगाने
में जुट जाते हैं... इसके अलावा एक और सोशल नेटवर्किंग साइट है ऑर्कुट... जिसका भारत
में तो चलन ना के बराबर रह गया है... इसका एक खास फीचर था कि अगर कोई आपके प्रोफाइल
के चक्कर लगाता है तो आपको पता चल जाएगा... शायद यही एक बड़ी वजह रही कि लोगों ने इस
साइट से दूरी बना लेना ही बेहतर समझा... खैर देर से ही सही लोगों को सोशल नेटवर्किंग
साइट्स की हकीकत समझ में आने लगी है लेकिन युवाओं को समझने में अभी देर है क्योंकि
इसकी वजह से भविष्य में होने वाली परेशानियों से वो अभी वाकिफ नहीं हैं... क्योंकि
ऐसी साइट्स की महज् अभी तो शुरुआत है... आगे क्या होगा किसे पता... क्योंकि ये ज़माना
टेक्नोलॉज़ी का है...

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