देश की सियासत में
कभी 'डेटा' लीक की चर्चा होती है...तो कभी बात 'डेट' लीक की होती है... आपने ठीक
समझा... ये दोनों ऐसे मसले हैं जिनपर देश के इनसे भी ज्यादा ज़रूरी मुद्दों से कहीं
ज्यादा चर्चा हो रही है... दोनों ही मसलों में असल बात कम और मसाला ज्यादा दिखता
है...असल में हकीकत ये है कि ज़रूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इन दिनों
फेसबुक और ट्वीटर एक बड़ा हथियार साबित हो रहा है... सोशल मीडिया पर जारी घमासान
के बीच मुश्किल ये है कि इसके ज़रिए एक दूसरे पर निशाना तो साधा जा रहा है लेकिन
चुनावी मौसम में भी रोटी, कपड़ा और मकान की बात नहीं हो रही है... अब कर्नाटक
विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भी हो गया लेकिन ज्यादा चर्चा हुई डेट लीक को
लेकर...चर्चा क्या हंगामा ही बरप उठा... दरअसल एक पार्टी विशेष के आईटी सेल के हेड
ने तारीखों का ऐलान अपने ट्वीटर हैंडल पर लगभग 12 घंटे पहले ही कर दिया... इसपर
हंगामा हुआ और ट्वीट को डिलीट कर दिया गया... लेकिन तीर कमान से निकल चुका था...
हंगामा बरपना लाज़िमी था क्योंकि ये एक ऐसा मुद्दा था जिसे तमाम पार्टियों ने
हाथों-हाथ लपक लिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ खड़े हुए... हालांकि
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कार्रवाई तो होगी लेकिन क्या कार्रवाई
होगी और कब होगी इसका जवाब नहीं दिया गया... लेकिन देश की जनता को कार्रवाई से
ज्यादा फिक्र इस बात की है कि उनकी बात क्यों नहीं हो रही है... खैर इंतज़ार रहेगा
असल मुद्दों का और इन मुद्दों पर असल चर्चा का... बाकी चर्चा तो मौसमी है...
चुनावी है... जनता की फिक्र किसे ?

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