इकिशा कौन है ?
नौवीं की एक छात्रा इकिशा की मौत ने झकझोर कर
रख दिया है... एक अच्छी क्लासिकल डांसर और पढ़ाई में औसत छात्रा ने जब ज़िंदगी से
हार मान ली तो तमाम सवाल उठ खड़े हुए... छात्रा के परिजनों ने स्कूल के दो टीचर्स
पर छेड़छाड़ और स्कूल प्रबंधन पर बदसलूकी का आरोप लगाया... असल में यहां छेड़छाड़
एक एक ऐसे सिस्टम के साथ हुई... जिसपर ज़िम्मेदारी देश के भविष्य की है... यहां
मानवता भी हारी और स्कूल प्रबंधन ने वो भरोसा भी खो दिया... जिसके भरोसे हम अपने
बच्चों को स्कूलों में भेजते हैं... हम स्कूल भेजने के बाद ये मान लेते हैं कि
स्कूल में बच्चे अपने उन मां-बाप के पास पहुंच गए हैं जो शिक्षा भी देंगे और
सुरक्षा भी... यहां तो शिक्षा देने वाले खुद शिक्षित नहीं निकले... यहां बात
एकेडेमिक शिक्षा की नहीं बल्कि नैतिक शिक्षा की हो रही है... शिक्षक और छात्र,
छात्राओँ का रिश्ता हर रिश्ते से कहीं ज्यादा पवित्र होता है लेकिन इस पवित्र
रिश्ते का स्याह चेहरा गाहे-बगाहे हमारे सामने आ ही जाता है... इस रिश्ते का विकृत
रुप भी सामने आ ही जाता है... इकिशा के मामले में उसके माता-पिता के दुख को शायद
ही कोई कम कर सकेगा लेकिन परिजनों ने ये समझते-समझते देरी कर दी कि उनकी बेटी किस
मानसिक स्थिति से गुज़र रही थी... इस बच्ची ने अपनी ज़िंदगी ही खत्म कर दी.,..
क्योंकि वो कई तरह के दबाव से गुज़र रही थी... मानसिक, सामाजिक, पढ़ाई और कथित तौर
पर स्कूल प्रबंधन ने दबाव ने एक ज़िंदगी को खत्म कर दिया... देश ने एक योग्य बच्ची
को खो दिया... हो सकता था कि भविष्य में ये बच्ची नृत्य की दुनिया में देश का नाम
रौशन करती... हो सकता है कि कई स्टेज पर शानदार परफॉर्मेंस के बाद ये मायानगरी का
हिस्सा बनती और माता-पिता का नाम रौशन करती... हो सकता कि इस बच्ची के साथ सेल्फी
लेने वालों की होड़ मच जाती... लेकिन इस बच्ची के साथ ये सारी संभावनाएं की खत्म
हो गईं... इस बच्ची ने अपनी ज़िंदगी को खत्म कर कई सवाल उठा दिए... इन सवालों को
जवाब हर रोज़ हर मां-बाप को ढूंढ़ना ही होगा...
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